Poems

खिलवाड़

on
April 1, 2013

हाँ  खिलवाड़ खुद रोज़ मै अपने साथ करता हूँ ,

तेरी याद में तड़पता दिन रात आहें भरता हूँ ।
हर बार कोशिश करता हूँ तूं दिल से निकल जाए ,
पर फिर मर कर तुझी से प्यार करता हूँ ।
हाँ  खिलवाड़ खुद रोज़ मै अपने साथ करता हूँ ।।
 
“चिराग ”  रहता है ग़मगीन मुस्कुराहटो के तले ,
तेरी यादों से मुलाकातें शरे  आम करता हूँ ।
टूट जाता हूँ याद  कर बेवफाई तेरी,
वफ़ा फिर भी हर पल तेरे साथ करता हूँ ।
हाँ  खिलवाड़ खुद रोज़ मै अपने साथ करता हूँ ।।
 
तूँ  कहती है मेरे गीतों में है बस उदासी छिपी ,
अरे मैं तो दर्द-ए दिल अपना बयाँ करता हूँ ।
मेरे रब से मुझे मिलाने की,
तेरे रब को हर पल अर्ज़ियाँ करता हूँ  ।
हाँ  खिलवाड़ खुद रोज़ मै अपने साथ करता हूँ ।।
 
आ मिल जा बस आ मिल जा तूँ ,
साँस  साँस में यही दुआ करता हूँ ।
सब कुछ बाकी ,हो गया बेमतलब,
बस तेरे लिए ही जीता मरता हूँ ।
 
यही खिलवाड़ खुद रोज़ मै अपने साथ करता हूँ ,
बेइंतहा तुझ से प्यार करता हूँ ।।
 

हाँ  खिलवाड़ खुद रोज़ मै अपने साथ करता हूँ ।।

 

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2 Comments
  1. Reply

    Ishan

    April 4, 2013

    awesom 🙂

  2. Reply

    Himanshu Grover

    April 20, 2013

    Thanks 🙂

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Abhishek Dudeja
India

Abhishek is the co-author of the Poetry Book "Rousing Cadence" which has been appreciated world wide. He is a graduate of engineering. He is an entrepreneur in motion. He is currently running his business venture "BIZDESIRE".

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